Sunday, December 14, 2025

ब्रह्मचैतन्या! ब्रह्मचैतन्या!


ब्रह्मचैतन्या, ब्रह्मचैतन्या!ध्रु.

तूच आशादीप माझा, कार्य माझे चालव 
वाढवी जनि भक्तिप्रेमा, शक्ति देइल राघव 
नाममहिमा सांग जगती शांति लाभाया!१

जागजागी मंदिरी प्रभु राम स्थापावा 
दीन लोकां तोषवोनी मार्ग दावावा
प्रेम वाढे सर्व स्थानी लाविता माया!२

सूर्य माथी जो प्रकाशे साक्षि तो आहे 
राम जगती राम हृदयी शोधुनी पाहे 
शिकव अज्ञा स्वप्रपंची देव जाणाया!३

रचयिता : श्रीराम बाळकृष्ण आठवले

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